Tuesday, November 13, 2018

भारत में किस तरह फैलती है फ़ेक न्यूज़: बीबीसी रिसर्च

बीबीसी के एक नए रिसर्च में ये बात सामने आई है कि लोग 'राष्ट्र निर्माण' की भावना से राष्ट्रवादी संदेशों वाले फ़ेक न्यूज़ को साझा कर रहे हैं और राष्ट्रीय पहचान का प्रभाव ख़बरों से जुड़े तथ्यों की जांच की ज़रूरत पर भारी पड़ रहा है.

आम लोगों के नज़रिए से फ़ेक न्यूज़ के प्रसार का विश्लेषण करते हुए प्रकाशित हुए पहले अध्ययन में ये जानकारियाँ सामने आई हैं.

इस रिपोर्ट में ट्विटर पर मौजूद कई नेटवर्कों का भी अध्ययन किया गया और इसका भी विश्लेषण किया गया है कि इनक्रिप्टड मैसेज़िंग ऐप्स से लोग किस तरह संदेशों को फैला रहे हैं.

बीबीसी की रिसर्च अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए क्लिक करें.
बीबीसी के लिए ये विश्लेषण करना तब संभव हुआ जब मोबाइल यूजर्स ने बीबीसी को अपने फोन का एक्सेस दिया.

प्रोजेक्ट के तहत ये रिसर्च किया गया है, जो ग़लत सूचनाओं के ख़िलाफ़ एक अंतरराष्ट्रीय पहल है. आज इसे लॉन्च किया जा रहा है.

रिपोर्ट में सामने आई मुख्य बातें
राष्ट्रवाद के नाम पर फैलाया जा रहा है फ़ेक न्यूज़- बीबीसी रिसर्च
बीबीसी ने भारत, कीनिया और नाइजीरिया में व्यापक रिसर्च किया है
ये रिपोर्ट विस्तार से समझाती है कि कैसे इनक्रिप्टड चैट ऐप्स में फ़ेक न्यूज़ फैल रही है
ख़बरों को साझा करने में भावनात्मक पहलू का बड़ा योगदान है
ग़लत सूचनाओं के फैलाव के ख़िलाफ़ एक अंतरराष्ट्रीय पहल है.

भारत में लोग उस तरह के संदेशों को शेयर करने में झिझक महसूस करते हैं जो उनके मुताबिक़ हिंसा पैदा कर सकते हैं लेकिन यही लोग राष्ट्रवादी संदेशों को शेयर करना अपना कर्तव्य समझते हैं.

भारत की प्रगति, हिंदू शक्ति और हिंदुओं की खोई प्रतिष्ठा की दोबारा बहाली से जुड़े संदेश तथ्यों की जांच किए बिना बड़ी संख्या में शेयर किए जा रहे हैं. इस तरह के संदेशों को भेजते हुए लोगों को महसूस होता है कि वे राष्ट्र निर्माण का काम कर रहे हैं.

कीनिया और नाइजीरिया में भी फ़ेक न्यूज़ फैलाने के पीछे भी कहीं न कहीं लोगों में कर्तव्य की भावना है.

लेकिन इन दोनों देशों में ये संभावना ज़्यादा है कि लोग राष्ट्र निर्माण की भावना की बजाय ब्रेकिंग न्यूज़ को साझा करने की भावना ज़्यादा होती है ताकि कहीं अगर वो ख़बर सच हुई तो वह उनके नेटवर्क के लोगों को प्रभावित कर सकती है.

सूचनाओं को हर किसी तक पहुँचाने की भावना यहां दिखाई पड़ती है.

ये रिपोर्ट ये भी बताती है कि भारत में फ़ेक न्यूज़ और मोदी के समर्थन वाली राजनीतिक गतिविधियाँ कई जगह एक जैसी हैं.

टर पर मौजूद नेटवर्कों के डेटा एनालिसिस से बीबीसी को ये जानकारी मिली है कि भारत में वामपंथी झुकाव वाले फ़ेक न्यूज के स्रोत आपस में उस तरह नहीं जुड़े हुए हैं, जिस तरह दक्षिणपंथी झुकाव वाले फ़ेक न्यूज़ के स्रोत में तालमेल है. इसी कारण दक्षिणपंथी झुकाव वाले फ़ेक न्यूज़ ज़्यादा प्रभावशाली ढंग से फैलते हैं.

भारत, कीनिया और नाइजीरिया में आम लोग अनजाने में ये उम्मीद करते हुए संदेशों को आगे बढ़ाते हैं कि उन ख़बरों की सत्यता की जांच कोई और कर लेगा.

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